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“Biraul” Supaul Darbhanga

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 सुपौल बाज़ार (बिरौल) कहा स्थित हैं कैसा हैं और क्यू  इतना प्रचलित हैं  सुपौल बाज़ार (बिरौल ) की बात करे तो हम सुपौल को सहरशा सुपौल से जोड़ने लगते हैं जबकि ऐसा नहि हैं सहरशा एक ज़िला हैं तो वही सुपौल भी एक ज़िला हैं  वही हम बिरौल सुपौल की बात करे तो आप पायेंगे कि सुपौल दरभंगा ज़िला के अंतर्गत आता हैं जिसकी वजह से एक अलग तरह की वहम की स्तिथि हो जाती हैं  परेशानी तो तब और हो जाती हैं की बिरौल या  सुपौल  लोगों को बस सफ़र के दौरान जिन्हें बिरौल सुपौल जाना होता हैं वो सुपौल ज़िला पहुँच जाते हैं और जिन्हें सुपौल ज़िला जाना होता हैं वो बिरौल की बस से बिरौल सुपौल पहुँच जाते हैं  ख़ैर गनिमत रही  अब की चाहे बिरौल हो या सुपौल ज़िला दोनो जगह से आने जाने के लिए बस और ट्रेन सेवा बहाल हो गयी हैं  जिससे स्तिथि पहले से बेहतर हो गयी हैं   दरभंगा से सुपौल ज़िला कैसे ज़ाया जायँ :- इसके लिए ज़्यादा परेशान होने की कोई ज़रूरत नहि हैं आप दरभंगा दिल्ली मोर बस स्टैंड से सीधा सुपौल ज़िला के लिए बस सेवा ले सकते है। या फिर दरभंगा डोनार से बिरौल NH17 के लिए बस ले सकते हैं फिर वहाँ से सहरशा और सुपौल ज़िला के लिए बस

Intermediate admit card BSEBPATNA

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http://biharboardonline.bihar.gov.in/  बिहार बोर्ड का एडमिट कार्ड आ चुका हैं  ये गुड न्यूज़ सभी अभ्यर्थी के लिए बात ही नहि एक ख़ुशी के पाल हैं BSEB PATNA आज उन सभी अभ्यर्थियों के सब्र  इम्तिहान की घड़ी को अब रुकना पड़ेगा बिहार बोर्ड के इंटर के परीक्षा का एडमित कार्ड आ चुका हैं  चलिए अब जानते हैं की एडमिट कार्ड  कितने बजे से उपलब्ध होगी आयोग की वेबसाइट पर ! तो हम यह उन सभी अभ्यर्थियों को बता देना चाहता हूँ की आयोग की वेबसाईट पर 10:00 से एडमिट कार्ड उपलब्ध होगी  अब कौन कौन डाउनलोड कर सकता हैं बिहार या संस्कृत बोर्ड से उत्रीन अभ्यर्थी जिनका रजिस्ट्रेशन इंटर संकाय के किसी भी स्ट्रीम से हुआ हो वो अभ्यर्थी अपना अपना एडमिट कार्ड लोड कर सकते हैं  एडमिट कार्ड लोड करे कैसे करे अपना एडमिट कार्ड लोड  सबसे पहले आपको आयोग की ओफिसियल वेबसाइट पर जाकर देख सकते हैं जैसा की आप इस चित्र में देख पा रहे हैं की आपको अपना रौल नम्बर रौल कोड  और एक केपचा जोड़ पूछा जाएगा और आप अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं  वि कौन सी साइट हैं जिस्पे आप जाके देख सकते है। अपना सेंटर   तो मैं आपको बता दु की आप आयोग की BSEB क

Indian cost guard :aarmy

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https://www.indiancostguard.gov.in/  इंडीयन कोस्ट गार्ड ने माँगे 358 पद भर्ती  शैक्षणिक योग्यता :- आवेदन करने वाले उम्मीदवार को मान्यता प्राप्त संस्था से 10 वी कक्षा 50% अंक से पास होना आवस्यक हैं पात्रता सम्बंधित विस्तृत जानकारी के लिए क्लिक करे  https://www.indiancostguard.gov.in/ आयु सीमा :- 1अप्रैल 2021 तक -18 से 22 साल तक का उम्र सीमा निर्धारित की गयी हैं उम्मीदवारों का जन्म 1अप्रैल 1999 से 31मार्च 2003के बीच हुआ हो  एससी एसटी को 5 को पाँच साल अवम ओबीसी को तीन साल की छूट प्रदान की गयी हैं ज़्यादा जानकारी के लिए यहाँ क्लिक  करे   क्लिक करे वेतमान सैलरी :- चयनीत उम्मीदवार को  7वे सीपीसी के लेवल 3 के अनुरूप 21700 रुपए वेतन के रूप में प्रति माह दिया जाएगा   सेलेक्सन ( चयन ) परिक्रिया उम्मीदवारों को प्रथम चरण लिखित परीक्षा व फ़िटनेस फिसिकल टेस्ट के आधार पर किया जाएगा  इस सबंध में विस्तृत जानकारी के लिए ओफिसियल वेबसाइट देखे  जाँच करे क्लिक हेरे     L आवेदन कैसे करे :- जनरल को 250 रुपए का आवेदन शुल्क देना होगा वही आरक्षण वर्ग को किसी भी तरह के कोई शुल्क का भुगतान नहीं करना होगा  कैसे

Delhi AIIMS Nurse Demand:

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 Delhi AIIMS Nurse Demand: Delhi is the capital of India and it is the map of the entire economy of India that is where the government operates. Moreover, this is also the beginning of the ministry and PIB Press. In such a situation, how do we forget the health department, Delhi is said to be the heart of the whole of India. But, as soon as it comes to health, Indira Gandhi Aryvedic Medical College (AIIMS DELHI), which is a scene that shook the soul, is coming out. Nursing strike in Delhi AIIMS has caused problems and floods for patients Nursing demands that the government is not serving them before and after their stipulated period, nor are they being kept as permanent (permanent) work and they are being allowed to go on some kind of leave. Some improvements in administration: farmers Doctor: So they are giving their consent on their demand, but these nurses say that they should do it in writing instead of oral Inspirational Story: Must Be Aim to Live

DELHI AIIMS : Nurse protest

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 दिल्ली एम्स के  नर्स की माँग : दिल्ली भारत की राजधानी यही से पिरे भारत की पूरी अर्थव्यवस्था की मेप रची जाती हैं यही से सरकार चलती है। और तो और यही से मंत्रालय एवं पी आइ बी प्रेस की सुरुआत भी होती हैं  ऐसे में हम स्वास्थ बिभाग को कैसे भूल जाते हैं कहने को तो पूरे भारत का हृदय दिल्ली को माना जाता है। लेकिन लेकिन स्वास्थ की बात आते ही इन्दिरा गाँधी आर्यवेदिक चिकित्सकिय महाविद्यालय ( AIIMS DELHI ) की जो रूह कंपा देने वाली दृश्य हो सामने आ रही हैं।  दिल्ली एम्स में नर्सिंग की हरताल से मरीज़ों की तकलीफ़ें और बाढ़ गयी हैं  नर्सिंग की माँग हैं की सरकार उन्हें तय अवधि से पहले और बाद तक उनसे सेवा ले रही हैं और ना ही उन्हें परमानेंट (स्थायी)  काम के तौर पर रख रही हैं  औरं ही उन्हें किसी तरह की अवकाश पे जाने दिया जा रहा हैं  प्रशासन के कामों में कुछ सुधार :किसान डॉक्टर :तो इनकी माँगे पर अपनी सहमती दे रहे हैं लेकिन इन नर्स का कहना हैं की इन्हें मौखिक की जगह इन्हें लिखित तौर पर अस्वास्त करे  प्रेरणदायक कहानी :जीने का मक़सद होना चाहिए

Ashok ka shilaalekh अशोक का शिलालेख :स्तंभ

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 स्तंभ :अशोक का शिलालेख  ज्वार भाटा (tide) केसे होता हैं ?    अशोक के राज्यकाल के दौरान स्तंभों के शिलालेख ( राजकोय प्रतीक ) के रूप में या युद्ध में जीत के उपलक्षय में आती महत्वप्रूनहो गए। साथ ही उसके राजकिय उपदेशों का प्रचार करने के लॉ भी स्तंभों का उपयोग किया।  औसतन 40 फ़ीट ऊँचे, ये स्तंभ समान्यत : चुनार के बलुआ पठार या प्रस्तर से बनाए गए थे और इसके चार भाग थे लम्बा मुठ आधार का निर्माण करता था। जोकी प्रस्तर के एक ही खंड अथवा एकाशम प्रस्तर से बना होता था। इसके सबसे ऊपर कमल या घंटे के आकार में शीर्ष या ललाट ईरानी स्तंभों से प्रभावित थे क्योंकि ये स्तंभ अत्याधिक पालिशदार और चमकदार थे। ललाट के ऊपर शीर्ष-फलक के रूप में ज्ञात विर्ताकार या आयातकार आधार होता था जिस पर पशु मूर्ति होती थी    उदाहरण :-चंपारन में “लोरियाँ नंदनघढ़” स्तंभ वराणशी में “सारनाथ स्तंभ” आदि  स्तूप :- स्तूप वेदिक काल से भारत में प्रचलित “श्वाघट टीले “थे यह अंत्येष्टि  मेघ पुंज का पारम्परिक निर्देशन हैं। इसमें “मृतकों के अवशेषों और राख को रखा जाता” था अशोक के राज्यकाल के दौरान स्तूप कला अपने चरमोत्कर्ष  पर पहुँच गयी। उसक

elman-जीने का एक मक़सद होना चाहिए -प्रेरणादायक कहानी

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इलवाद एलमन :सोमालियाई शांतिवादी  दुनिया के विफल देशों का जब - जब ज़िक्र आता हैं  सोमालिया का नाम सबसे पहले जहां में उभरता हैं। और इसके साथ ही एक सवाल भी नत्थी रहता हैं। आख़िर वहाँ के लोग केसे जीते होंगे? मगर वो जी भी रहे हैं और अपनी ख़ातिर सोमालिया की आने वाली नस्लो की ख़ातिर ज़िंदगी से जंग भी लड़ रहे हैं। राजधानी मोंगादीशु में ऐसे ही एक दिलेर दम्पति के घर इल्वाद एल्मन का जन्म हुआ आने वाले 22 दिसम्बर को वह 31 साल की हो जाएगी।  भारतीय संगीत का इतिहास ias ips qustion इल्वाद के उधमी पिता अली अहमद 1990 के दशक में एक प्रखर शांतिवादी थे। उनकी अलनी मोटर वर्कशोप थी,जहां लोग अपनी गाड़ियाँ दुरुशत कराने आया करते थे सोमालिया के हालात दिन -ब -दिन बिगारते जा रहे थे राजधानी तक गृह युद्ध की लपटों से महफ़ूज़ न थी। चार बेटियाके पिता अहमद मानते थे की हालात बदलने को कोई बाहर से नहि आएगा सोमाली लोगों को ही इसकी पहल करनी होगी   खाशकर किशोरों-नौजवानो की मुलाक़ात एक पुराअमन सोमालिया के सपने से करानी होगी  अहमद ने नई नस्लो को प्रेरित करना शुरू कर दिया उनका एक एक नारा उन डीनो बेहद चर्चित हुआ था-“बंदूक़ फेंको क

indian songs-भारतीय संगीत का इतिहास civil service

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एल्वन:प्रेरणाश्रोत कहानी   परिचय :- संगीत किसी भी संस्कृति की आत्मा होती हैं और भारत में संगीत की सुदीर्घ परम्परा रही हैं भारतीय संगीत का इतिहास अति जतील हैं । इसका उदभाव शास्त्रीय संगीत से हुआ और इसमें पशिचमी तत्त्व समाहित हो गये हैं और यह संयोजक हमारी आत्मा के साथ प्रतिधवनित होता हैं यह कहा जाता हैं की पृथ्वी पर   नारद मुनि ( ऋषि ) ने संगीत कला को शुभारंभा किया था उन्होंने नारदभरहम  नामक पूरे ब्रह्मांड में व्याप्त धवनि के विषय में भी यहाँ के निवासियो को बताया था सिंधु  घाटी के सभ्यता के स्थलों पर सात -छिर्दो वाली बाशूरि और रावणहत्था जैसे संगीत वाध पाए गए हैं  प्रेरणाश्रोत कहानी :एलवान अशोक का स्तंभ :history of ashok हमें पहली बार दो हज़ार वर्ष पहले   वेदिक काल में संगीत साहित्यक प्रमाण मिलता है राग ( खरहरप्रिया ) के सभी सातों स्वर में साम  वेद में अवरोही क्रम में पाए जा सकते है संगीत विज्ञान को गंधरव वेद कहा जाता है यह सामवेद का उपवेद है वीना के कुछ भागो का उल्लेख एतरेय आरण्य में आता हैं जैमिनि भ्रह्मन सामूहिक रूप से  निर्त्य और संगीत की बात करते हैं  कोस्तिकी भ्राह्मण निर्त्य गायन

ज्वार भाटा” TIDES कब कितने प्रकार कैसे ?

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 ज्वार भाटा क्या हैं  ज्वार भाटा समुंदर की अस्थिर गतियों में से एक हैं इसके फल स्वरूप सागर जल सागर तल से कभी ऊपर और कभी नीचे होता हैं इस क्रिया को  ज्वार-भाटा कहते हैं समुंदर जल के ऊपर उठने अथवा आगे बढ़ने को ज्वार (tide) कहते हैं और नीचे गिरने या पीछे लौटने को भाटा (Ebb) कहते हैं मरे के अनुशार सूर्य और चंद्रमा की आकर्षण शक्ति के कारण समुंदर जल के नियमित रूप से उठने और नीचे गिरने की क्रिया को ज्वार भाटा कहते हैं  आधार कार्ड डाउनलोड करे बिना मोबाइल नम्बर के ? जवार की उतपत्ति:-पृथ्वी के महासागर जल में ज्वाल की उत्पत्ति चंद्रमा और सुर्यके आकर्षण बलों द्वारा होती हैं चंद्रमा सुर्य की अपेक्षा पृथ्वी के अधिक समीप रहती हैं इसलिए चंद्रमा का प्रभाव अधिक होता है चंद्रमा की आकर्षण शक्ति का प्रभाव इसके सामने स्थित भाग पर अधिक होता हैं जबकि पीछे स्थित भाग पर न्यूनतम इस आकर्षण शक्ति के फलस्वरूप महासागरों का जल ऊपर खिच जाता हैं जिस कारण उच्च ज्वार अनुभव किया जाता हैं इस स्थान के ठीक पीछे भी एक उच्च ज्वार अनुभव किया जाता हैं क्योंकि पृथ्वी के आगे की ओर खिच जाने के कारण जल ऊपर उआठा दिखाई देता हैं  ASI

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